किण विद राखेला राम (सोरठ भजन)
1. किण विद राखेला राम दोहा- सोरठ मीठी रागणी, मत छेड़े प्रभात।
उड़ता पंछी गिर पड़े, कै उठे वैराग।।
कांई जाणुं किण विद राखेला राम ।। टेर ।।
हरिया डाल दोई पंछी बैठाए रट रह्यो रामजी रो नाम ।1।
कांई जाणुं किण विद ...........................
नीचे पारधी ने बाण सांधियोए उपर घूमे सुसाण ।2।
कांई जाणुं किण विद ..............................
दुष्ट पारधी ने नाग डसियो, सिकरा रे लागो बाण।3।
कांई जाणुं किण विद .................................
बाई मीरा गावे प्रभु गिरधर रा गुण, पंछीड़ा रे भयो आराम ।4।
कांई जाणुं किण विद ............................
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