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रावणा के देश गयो, सिया को संदेशो लायो

 रावणा के देश गयो, सिया को संदेशो लायो । कबहँ ना किन्ही जोधा, बात अभिमान की।। रावणा के देश गयों सिया को संदेशो लायो, रावणा के देश गयो।। राक्षसों को मार डाला, वाटिका उजाड़ डाली,  बात मानी नाही, रावण बलवान की। रावणा के देश गयो .......... छिन में समुदर लांघियों, पल में पहाड लायो।  लायो संजीवन बूटी, लक्ष्मण प्राण की।। रावणा के देश गयो .......... सुनो, भरत भैया, दुहाई दशरथ जी की।  हनुमंत ना हो तो, कौन लातो जानकी।। रावणा के देश गयो .......... तुलसीदास, आस रघुवर की।  बलिहारी जाऊं मैं तो, बली हनुमान की।। रावणा के देश गयो ..........

सरव सुख तुम भजिये गोपाल (सोरठ भजन)

सोरठ भजन सरव सुख तुम भजिये गोपाल भजियां जावो नन्दलाल, सरव सुख तुम भजिये गोपाल बाल पणा में कृष्ण सुदामा, पढता एक पोशाल । कंचन महल चुणाय दिया रे, हीरा जड़िया दीन दयाल ।। सरव सुख तुम भजिये..................... इन्द्र कोप कियो ब्रज उपर, बरस्यो मूसलाधार । गोपी ग्वालियों ने तार लियो रे, नख पर गिरवर धार ।। सरव सुख तुम भजिये..................... पत राखी पैलाद री, ध्रुवजी रो अविचल राज । जल डूबतो गजराज उबारियो, सरवर बांधी पाल ।। सरव सुख तुम भजिये..................... वृन्दावन री कुंज गली में, रास रसायो नन्दलाल । सब सखियो रे बीच में, नाच रह्यो नन्दलाल ।। सरव सुख तुम भजिये..................... आज बृज में आणन्द घणेरो, घर . घर मंगलाचार । मीरां दासी चरण श्याम री, हरि जी लियो अवतार ।। सरव सुख तुम भजिये.....................

जागो श्याम मनोहर माधव (प्रभाती भजन)

    प्रभाती भजन जागो श्याम मनोहर माधव भोम डसण रिपु टेर दियो । जागो श्याम मनोहर माधव.......................................... 1. जल सुत मिंत सुता पति नातीए ता वाहन मिल केल कियो । हरि वाहन के रिप सुत बंधवए अम्बज सुत को दान दियो ।। जागो श्याम मनोहर माधव.......................................... 2. हेम सुता पति ता सुत वाहनए ता भख भखणी वचन कियो । सुरपति वाहन के रिप बन्धवए अपने घर को गमन कियो ।। जागो श्याम मनोहर माधव.......................................... 3. सायर सुता सुत शीतल भयहूंए चार तत्व ज्योति मन्द भयो । सम्पति के रिपु के रिप प्रकटेए रम्भा सुत को मेल भयो ।। जागो श्याम मनोहर माधव .......................................... 4. उडगण वृन्द गये घर अपनेए दधि सुत को तप तेज गयो । सूर कहे व्याकुल भयी रजनीए काश्यप सुत प्रकाश भयो ।। जागो श्याम मनोहर माधव ..........................................

भीलणी थॉंरे द्वारे आया, श्री भगवान (सोरठ भजन)

भीलणी थारे द्वारे आया दोहा- रागां रो पति सोरठो, बाजां रो पति बीण देशां पति है मालवो, शहरां पति उजैण भीलणी थॉंरे द्वारे आया, श्री भगवान।।टेर।। वन वन फिरता राम, दोनों भईया रे, आया है शिवरी रो धाम।।1।। भीलणी थॉंरे द्वारे.................................. आसन बिछायी रामा परकमा दीनी रे, बैठा बैठा लिसमण राम ।2ं।। भीलणी थॉंरे द्वारे.................................. चरण खोळ रामा चरणामृत लीनो रे, लुळ लुळ करे है प्रणाम ।।3।। भीलणी थॉंरे द्वारे................................... सरजू रो नीर रामा निर्मल कीनो रे, सारे सारे ऋषियों रा काम ।।4।। भीलणी थॉंरे द्वारे....................................... तुलसी दास रामा भीलणी बड़ भागण रे शिवरी रटियो रामजी रो नाम ।।5।। भीलणी थॉंरे द्वारे.........................................

राम गुण कैसे लिखुं, लिखियो नी जाय (सोरठ भजन)

राम गुण कैसे लिखुं, दोहा-. सोरठ रो दूहो भलो, कपड़ो भलो रे सफेद। ठाकर तो दातार भलो, घोड़ो भलो रे कमेद।। हरी रा गुण कैसे लिखुं, लिखियो नी जाय ।।टेर।। सात समन्द री रामा स्याही मंगा दूं रे, कलम करूं वनराय।।1।। हरी रा गुण कैसे लिखुं............................... कलम भरूं तो रामा कर म्हारा कांपै रे, नैणों में रह्यो जल छाय।।2।। हरी रा गुण कैसे लिखुं.................................. प्राणपति तो म्हारा अजहू नी आया रे, कानूड़ा ने दीजो समझाय।।3।। हरी रा गुण कैसे लिखुं................................. बाई मीरां गावै प्रभु गिरधर रा गुण रे, चरण कंवल लिपटाय।।4।। हरी रा गुण कैसे लिखुं..................................

किण विद राखेला राम (सोरठ भजन)

1. किण विद राखेला राम दोहा- सोरठ मीठी रागणी, मत छेड़े प्रभात। उड़ता पंछी गिर पड़े, कै उठे वैराग।। कांई जाणुं किण विद राखेला राम ।। टेर ।। हरिया डाल दोई पंछी बैठाए रट रह्यो रामजी रो नाम ।1। कांई जाणुं किण विद ........................... नीचे पारधी ने बाण सांधियोए उपर घूमे सुसाण ।2। कांई जाणुं किण विद .............................. दुष्ट पारधी ने नाग डसियो, सिकरा रे लागो बाण।3। कांई जाणुं किण विद ................................. बाई मीरा गावे प्रभु गिरधर रा गुण, पंछीड़ा रे भयो आराम ।4। कांई जाणुं किण विद ............................

भज निम्बेसर महाराज निरंजन नीको

  (भज निम्बेसर महाराज)                       शिवजी के भजन                          भज नीम्बेसर महाराज निरंजन नीको, निरंजन नीको, म्हें धरूं हिरदे में, ध्यान सदा शिवजी को । इक रट रट रावण जाय सेवना कीनी, सेवना कीनी, जब प्रसन्न भये महाराज लंका लिख दीनी ।।1।।              भज नीम्बेसर महाराज....................... एक कानों में कुण्डल जोत जगामग झलके, जगामग झलके, ज्यारे मस्तक उपर भाल चन्द्रमा भलके ।।2।।              भज नीम्बेसर महाराज....................... इक  बागाम्बर की शॉल बिछावण बंकी, बिछावण बंकी, पार्वतों ढोले वाव हाथ गल पंखी ।।3।।              भज नीम्बेसर महाराज....................... इक पड़ा भुजंगी नाग सर्प ज्युं काला , सरप ज्यूं काला, ज्यांरे हिवड़े हडूके हार गले मुण्ड माला ।।4।।              भज नीम्बेसर महाराज...............