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Showing posts from July, 2025

रावणा के देश गयो, सिया को संदेशो लायो

 रावणा के देश गयो, सिया को संदेशो लायो । कबहँ ना किन्ही जोधा, बात अभिमान की।। रावणा के देश गयों सिया को संदेशो लायो, रावणा के देश गयो।। राक्षसों को मार डाला, वाटिका उजाड़ डाली,  बात मानी नाही, रावण बलवान की। रावणा के देश गयो .......... छिन में समुदर लांघियों, पल में पहाड लायो।  लायो संजीवन बूटी, लक्ष्मण प्राण की।। रावणा के देश गयो .......... सुनो, भरत भैया, दुहाई दशरथ जी की।  हनुमंत ना हो तो, कौन लातो जानकी।। रावणा के देश गयो .......... तुलसीदास, आस रघुवर की।  बलिहारी जाऊं मैं तो, बली हनुमान की।। रावणा के देश गयो ..........

सरव सुख तुम भजिये गोपाल (सोरठ भजन)

सोरठ भजन सरव सुख तुम भजिये गोपाल भजियां जावो नन्दलाल, सरव सुख तुम भजिये गोपाल बाल पणा में कृष्ण सुदामा, पढता एक पोशाल । कंचन महल चुणाय दिया रे, हीरा जड़िया दीन दयाल ।। सरव सुख तुम भजिये..................... इन्द्र कोप कियो ब्रज उपर, बरस्यो मूसलाधार । गोपी ग्वालियों ने तार लियो रे, नख पर गिरवर धार ।। सरव सुख तुम भजिये..................... पत राखी पैलाद री, ध्रुवजी रो अविचल राज । जल डूबतो गजराज उबारियो, सरवर बांधी पाल ।। सरव सुख तुम भजिये..................... वृन्दावन री कुंज गली में, रास रसायो नन्दलाल । सब सखियो रे बीच में, नाच रह्यो नन्दलाल ।। सरव सुख तुम भजिये..................... आज बृज में आणन्द घणेरो, घर . घर मंगलाचार । मीरां दासी चरण श्याम री, हरि जी लियो अवतार ।। सरव सुख तुम भजिये.....................

जागो श्याम मनोहर माधव (प्रभाती भजन)

    प्रभाती भजन जागो श्याम मनोहर माधव भोम डसण रिपु टेर दियो । जागो श्याम मनोहर माधव.......................................... 1. जल सुत मिंत सुता पति नातीए ता वाहन मिल केल कियो । हरि वाहन के रिप सुत बंधवए अम्बज सुत को दान दियो ।। जागो श्याम मनोहर माधव.......................................... 2. हेम सुता पति ता सुत वाहनए ता भख भखणी वचन कियो । सुरपति वाहन के रिप बन्धवए अपने घर को गमन कियो ।। जागो श्याम मनोहर माधव.......................................... 3. सायर सुता सुत शीतल भयहूंए चार तत्व ज्योति मन्द भयो । सम्पति के रिपु के रिप प्रकटेए रम्भा सुत को मेल भयो ।। जागो श्याम मनोहर माधव .......................................... 4. उडगण वृन्द गये घर अपनेए दधि सुत को तप तेज गयो । सूर कहे व्याकुल भयी रजनीए काश्यप सुत प्रकाश भयो ।। जागो श्याम मनोहर माधव ..........................................

भीलणी थॉंरे द्वारे आया, श्री भगवान (सोरठ भजन)

भीलणी थारे द्वारे आया दोहा- रागां रो पति सोरठो, बाजां रो पति बीण देशां पति है मालवो, शहरां पति उजैण भीलणी थॉंरे द्वारे आया, श्री भगवान।।टेर।। वन वन फिरता राम, दोनों भईया रे, आया है शिवरी रो धाम।।1।। भीलणी थॉंरे द्वारे.................................. आसन बिछायी रामा परकमा दीनी रे, बैठा बैठा लिसमण राम ।2ं।। भीलणी थॉंरे द्वारे.................................. चरण खोळ रामा चरणामृत लीनो रे, लुळ लुळ करे है प्रणाम ।।3।। भीलणी थॉंरे द्वारे................................... सरजू रो नीर रामा निर्मल कीनो रे, सारे सारे ऋषियों रा काम ।।4।। भीलणी थॉंरे द्वारे....................................... तुलसी दास रामा भीलणी बड़ भागण रे शिवरी रटियो रामजी रो नाम ।।5।। भीलणी थॉंरे द्वारे.........................................

राम गुण कैसे लिखुं, लिखियो नी जाय (सोरठ भजन)

राम गुण कैसे लिखुं, दोहा-. सोरठ रो दूहो भलो, कपड़ो भलो रे सफेद। ठाकर तो दातार भलो, घोड़ो भलो रे कमेद।। हरी रा गुण कैसे लिखुं, लिखियो नी जाय ।।टेर।। सात समन्द री रामा स्याही मंगा दूं रे, कलम करूं वनराय।।1।। हरी रा गुण कैसे लिखुं............................... कलम भरूं तो रामा कर म्हारा कांपै रे, नैणों में रह्यो जल छाय।।2।। हरी रा गुण कैसे लिखुं.................................. प्राणपति तो म्हारा अजहू नी आया रे, कानूड़ा ने दीजो समझाय।।3।। हरी रा गुण कैसे लिखुं................................. बाई मीरां गावै प्रभु गिरधर रा गुण रे, चरण कंवल लिपटाय।।4।। हरी रा गुण कैसे लिखुं..................................

किण विद राखेला राम (सोरठ भजन)

1. किण विद राखेला राम दोहा- सोरठ मीठी रागणी, मत छेड़े प्रभात। उड़ता पंछी गिर पड़े, कै उठे वैराग।। कांई जाणुं किण विद राखेला राम ।। टेर ।। हरिया डाल दोई पंछी बैठाए रट रह्यो रामजी रो नाम ।1। कांई जाणुं किण विद ........................... नीचे पारधी ने बाण सांधियोए उपर घूमे सुसाण ।2। कांई जाणुं किण विद .............................. दुष्ट पारधी ने नाग डसियो, सिकरा रे लागो बाण।3। कांई जाणुं किण विद ................................. बाई मीरा गावे प्रभु गिरधर रा गुण, पंछीड़ा रे भयो आराम ।4। कांई जाणुं किण विद ............................

भज निम्बेसर महाराज निरंजन नीको

  (भज निम्बेसर महाराज)                       शिवजी के भजन                          भज नीम्बेसर महाराज निरंजन नीको, निरंजन नीको, म्हें धरूं हिरदे में, ध्यान सदा शिवजी को । इक रट रट रावण जाय सेवना कीनी, सेवना कीनी, जब प्रसन्न भये महाराज लंका लिख दीनी ।।1।।              भज नीम्बेसर महाराज....................... एक कानों में कुण्डल जोत जगामग झलके, जगामग झलके, ज्यारे मस्तक उपर भाल चन्द्रमा भलके ।।2।।              भज नीम्बेसर महाराज....................... इक  बागाम्बर की शॉल बिछावण बंकी, बिछावण बंकी, पार्वतों ढोले वाव हाथ गल पंखी ।।3।।              भज नीम्बेसर महाराज....................... इक पड़ा भुजंगी नाग सर्प ज्युं काला , सरप ज्यूं काला, ज्यांरे हिवड़े हडूके हार गले मुण्ड माला ।।4।।              भज नीम्बेसर महाराज...............

बजरंगी बाला करो नी विध्न सब दूर (Hanumanji ke Bhajan)

  बजरंगी बाला करो नी विध्न सब दूर (Hanumanji ke Bhajan) बालाजी महाराज के भजन ओ बजरंगी बाला, करियो विध्न सब दूर, अंजनी के लाला, करो नी विध्न सब दूर, हनुमान हठीला, करियो विध्न सब दूर, रामचन्द्रजी के सारे काजा, सागर उपर बांध दी पाजा, मार दियो लंका पति राजा, कर दीनो चकनाचूर, बजरंगी बाला करियो विध्न ............... सालासर तेरा भवन बिराजे, नित उठ द्वारे नौबत बाजे, झालर शंख नगारा बाजे, चढ रह्यो तेल सिन्दूर, बजरंगी बाला करियो विध्न ............... छोटे पांव, बड़े भुज दण्डन, दुष्टन मार कर कर दियो खण्डन, तुम बजरंगी हो दुख भंजन, मुख पर बरसे नूर, बजरंगी बाला करियो विध्न ............... हनुमत ने संसार मनावे, जिनका बेड़ा प्रभु पार लगावे, बद्रीलाल ब्राह्मण गावे, विद्या देवो नी भरपूर, बजरंगी बाला करियो विध्न ............... और भजन देखें : https://marwadigeetbhajan.blogspot.com/2025/07/blog-post_36.html

भलो वै ला भगवत ने भजियों

  भलो वै ला भगवत ने भजियों  सरियादे मात सेवा में बैठा विलखी फिरे मंजारी, के तो बसिया परा उबारो, काया होम दूं मारी,  रोम रो राख भरोसो भारी ।।1।। टेर:-भलो वे ला भगवत ने भजियो भलो वेला साहेब ने सिमरिया ,सोइ भजो नर नारी राम रो राख भरोसो.....  ध्रुव पेहलाद जुगत कर झाली, झाली सेवना तुमारी, भगतो रे काज भूप ने दलिया नरसिंग रूप थे धारि।।2।। राम रो राख भरोसो भारी भलो वे ला भगवत ने भजियो भलो वेला साहेब ने सिमरिया ,सोइ भजो नर नारी राम रो राख भरोसो..... चढ़िया राम लूटन गढ़ लंका पल में लंका जारी, रावण मार विभीषण थापियो, प्रीत आगली पाली।।3।। राम रो राख भरोसो भारी भलो वे ला भगवत ने भजियो भलो वेला साहेब ने सिमरिया ,सोइ भजो नर नारी राम रो राख भरोसो..... गज अरु ग्राह लड़े जल भीतर लड़त लड़त गज हारी,  तल भर सूंड रही जल बाहर रामो राम पुकारी राम रो राख भरोसो भारी भलो वे ला भगवत ने भजियो भलो वेला साहेब ने सिमरिया ,सोइ भजो नर नारी राम रो राख भरोसो..... सुनी पुकार वार सढिया गज री , गरुड़ तणी असवारी सकर चलाय हरी फंद कटिया, डूबत गज ने तारी राम रो राख भरोसो भारी भलो वे ला भगवत ने भजियो भलो व...

एड़ा सतगुरु जोई

  एड़ा सतगुरु जोई  मन ऐडा सतगुरु जोई भक्ति योग ने ज्ञान वैरागा,शिलवान निर्मोई  मन रे एड़ा सतगुरु जोई ।।टेर।। पर उपकार सदा हित कारण आया जग रे माई। दे उपदेश दया कर दाता जन्म मरण दुःख धोई ॥1।।           भक्ति योग ने ज्ञान वैरागा.............टेर पर निंदा स्तुति तज दोनो हरक शौक नही होई। दीन दयाल दया रो सागर जन्म मरण दुःख धोई॥2।।           भक्ति योग ने ज्ञान वैरागा.............टेर देय अभिमान भेख रो बड्पन रज मात्र ना होई। सम द्रष्टि चारो पर देखे क्या मित्र क्या द्रोही ॥3।।           भक्ति योग ने ज्ञान वैरागा.............टेर कहे कबीर संत है विरला लादे जग रे माई। पारस भँवर चनण सत्संगा, एवा करले सोई॥4।।           भक्ति योग ने ज्ञान वैरागा.............टेर

रमता रावल आया

  रमता रावल आया   रमता रावल आया शहर मे शहर में रमता रावल आया,जुना जोगी आया। टेर। पाँचों रा भूप पच्चीसो न्याति एक जरणी रा जाया। गुण अवगुण से न्यारा खेले अपना रूप  छिपाया॥1।।           शहर में रमता रावल आया........ टेर कुण घर सोवो कुण घर जागो कुण में रे वो समाया। किये पुरूष रा ध्यान धरो,किणे थाने शब्द सुणाया ॥2।।           शहर में रमता रावल आया........ टेर सहि घर सोवो भौण घर जागो सुन में रेवो समाया। अलख पुरुष रा ध्यान धरा सतगुरु शब्द सुणाया ।।3।।           शहर में रमता रावल आया........ टेर जागा वो नर प्रेम पद पाया सुतोड़ा ने जम ले जाया। कहत कबीर सुणो भाई संतों अगम संदेशों लाया ॥4।।           शहर में रमता रावल आया........ टेर

चोला संतोषी पेहरिया

  चोला संतोषी पेहरिया सोला संतोषी पेरिया ज्ञान गेरू में रंगिया। सुमता री चादर ओढ, अंग पे भभूत रमाया।।1।।    वणिया वैरागी हरि नाम रा हरि गुण होरे गुण गाय   सतगुरु म्हां पर मेहर करी,गुरू माने ज्ञान बताया रे हा मन रा कीना मणकला तन डोरा में पोया। घट में माला फेरता नाम निगे कर जोया ॥2।।        वणिया वैरागी हरि नाम रा .......... टेर शील लंगोटा हेरिया खमिया पावडी चढिया। जरणो री झोली डाल दी निर्गुण रोटी लाया ॥3।।        वणिया वैरागी हरि नाम रा .......... टेर दया धर्म री आ मंडली तीन पाँच समझाया। बगसो खाती बोलियाँ इण विध जोग कमाया ॥4।।        वणिया वैरागी हरि नाम रा .......... टेर

हर भज हर भज हीरा परख ले

  हर भज हर भज हीरा परख ले  हर भज हर भज हीरा परख ले, समझ पकड़ नर मजबूरती। साचा समरन करो सायब रा, और बारता सब झुठी ।। टेर।। इन्द्र घटा ज्यूँ म्हारा सतगुरु आया, अमृत बुंदा हृद बूटी । त्रिवेणी के रंग महल में साधा लाला हद लूटी ॥1।।           साचा सिमरण करो सायब रा .......... टेर इण काया में पाँच चोर है, जिनकी पकड़ो सिर चोटी । पाँचो ने मार पच्चीस वश करले जद जाणा तेरी रजपुती ॥2।।           साचा सिमरण करो सायब रा .......... टेर संत सुमरण का सैल बणाले, ढाल बणाले धीरज की। काम, क्रोध ने मार हटा दे, जद जाणु थारी मजबुती ॥3॥           साचा सिमरण करो सायब रा .......... टेर झरमर-२बाजा बाजै, झिलमिल ज्योतो वे जलती। ओंकार पर रणोकार है हँसला चुग गया निज मोती ॥4।।           साचा सिमरण करो सायब रा .......... टेर पक्की घड़ी का तोल बणाले, काण ने राखो एक रती। गुरु चरणे मछेन्द्र बोले, अलख लख्या सो खरा जती ॥5।।           साचा सिमरण करो सायब रा .......... टेर

राम भजो डर काहे को

  राम भजो विश्वास राखजो  राम भजो विश्वास राखजो, सायब भीडू थांको राम भजो डर काहे को ।।टेर।। श्रीयादे मात सेवा में बैठा,ध्यान धरे धणीयो को चार बर्तन प्रभु कोरा राखिया, आखो निवाडो पाको ॥1।।           राम भजो डर काहे को...........टेर कैरव पांडवो रे भारत रसीओ, आयो मरण रो हाको । पांडवो रे बेले रामजी पदारिया,बाल ना कीनो वाको ॥2।।           राम भजो डर काहे को...........टेर रामजी रो नाम लेवा नी देव, ओई हिरणाकुश वंको । खम्ब फाड़ नरसिंह रूप धरियो,पसे फ़ाडीओ बाको ।।3।।           राम भजो डर काहे को...........टेर रण भारत में टीटोडी रा बसिया धूजै कालजो मॉँ को । वीर घंट बसिया पर पड़ियो, हमे बाण भले फेंको॥4।।           राम भजो डर काहे को...........टेर चोरी करेन सीताजी ने लेगा रावण कीनो थोको। बीस भुजा रावण री तोड़ी ,पतो नि लगो वको ॥5।।           राम भजो डर काहे को...........टेर जीयाराम गुरु पुरा मिलिया पथ बतायो मोने वाको। कहे बन्नानाथ सुणणो भाई संतों जोर नी लागे थाको ॥6।। ...

भली करी गुरु दाता, जिव राख्यो चौरासी में जाता

  भली करी गुरु दाता  गुरु महिमा भजन भली करी गुरु दाता, जिव राख्यो चौरासी में जाता। भूलू नहीं लाखो बाता, म्हारे गुरु वचनो रा नाता।। टेर।। करम गली में आयो, करमां सु काठो लगायो। गुरु बचा लियो दोनूं हाथां , म्हारे गुरु वचनो रा नाता।।1।।         भली करी गुरु दाता..............टेर पगां तणो पांगलियो, म्हारा सतगुरु हेलो सांभळियो। नहीं तो रन वन में रह जाता, म्हारे गुरु वचनो रा नाता।।2।।        भली करी गुरु दाता..............टेर आँख्यां छतो अंधारो, गुरु भूण्डो हाल हमारो। सत्संग रा खेल बताया म्हारे गुरु वचनो रा नाता।।।3।।        भली करी गुरु दाता..............टेर मोह माया री नदी है भारी, जिण में बह गयो कई वारि। गुरु बचा लियो बह जाता, म्हारे गुरु वचनो रा नाता।।।4।।        भली करी गुरु दाता..............टेर सतगुरु सेण बताई, साधु सिमरथ राम सुधि पाई। गुरु चरणों में माथा रे, म्हारे गुरु वचनो रा नाता।।5।।        भली करी गुरु दाता..............टेर

सन्तो री गति न्यारी

  सन्तो री गति न्यारी  संतो री गति न्यारी रे, संतो री गति न्यारी जग में। जप तब नेम व्रत और पूजा प्रेम सभी से भरी ।। टेर ।। जाती वर्ण हरि राखी वे तो, गणिका ने क्यों तारी रे । शिवरी जात री भीलनी कहिजे कुटिल कुल नारी ॥ 1 ।।           संतो री गति न्यारी जग में ............ टेर जात जलावो नाम कबीरो, भाया करी कलाली । वण वणजारो बालद ले आयो, आपो आप मुरारी ॥ 2 ।।           संतो री गति न्यारी जग में ............ टेर धना भगत ओर कालू सेना, नामो नाम हजारी रे । कर्मा जाटणीमीरा बाई,  कई हो गया भव से पारी ॥ 3।।           संतो री गति न्यारी जग में ............ टेर पांचो पांडवो यग रसायो, सब मिल करी तैयारी रे । वाल्मीकि विन काज न सरियो, बाजियों संख सुजारी ॥ 4 ।।           संतो री गति न्यारी जग में ............ टेर वेद पुराण भागवत गीता, सब मिल आई पुकारी। केह सुखदेव सुणो गुरूदाता, काज किना रे मुरारी ॥ 5 ।।           संतो री गति न्यारी जग में ............ टेर

लागे मोहे राम प्यारा

  लागे मोहे राम प्यारा  लागे ओ माने राम पियारा रे। प्रीत तजी संसार की मन हो गया न्यारा रे, लागे ओ माने राम पियारा रे।। टेर  ।। सतगुरु शब्द सुणाविया, गुरू ज्ञान विचारा रे। भ्रम तिमर सब भागिया, होवे घट उजियारा रे ।।1।।             लागे ओ माने राम पियारा रे ........ टेर  मैं बंदा उस ब्रह्म का ज्यारा वार नी पारा रे । ताहिं भजे कोई साधवा जिने तन मन वारा ओ ।।2।।            लागे ओ माने राम पियारा रे ........ टेर  चाख चाख फल छोडिया माया रस खारा रे । राम अमि रस पिजिए नित वारमवारा रे ।। 3 ।।            लागे ओ माने राम पियारा रे ........ टेर  आन देव ने ध्यावसी ज्योरे मुख सारा रे । राम निरंजन ऊपरे किया मन ने न्यारा रे ।। 4 ।। लागे ओ माने राम पियारा रे

म्हे तो उन संतो रो दास

  म्हे तो उन संतो रो दास में तो उण रे सन्तो रो कहिजूँ दास, जिन्होंने मन मार लिया। टेर   मन मारया तन वश किया जी, करी भरमाना दूर। बाहर तो कुछ दिखत नाही, अंदर झलके वारे नूर।। 1 ।।        जिन्होंने मन मार लिया  मैं तो उन सन्तो रो …............. टेर आपा मार जगत में बैठा नहीं किसी से काम। उण में तो कुछ अंतर नाही, संत कहो जी चाहे राम।। 2 ।।        जिन्होंने मन मार लिया  मैं तो उन सन्तो रो …............. टेर प्याला पिया प्रेम का जी, छोड्या जग का मोह। म्हाने सतगुरु ऐसा मिलिया, सहजा ही मुक्ति होय।। 3 ।।        जिन्होंने मन मार लिया  मैं तो उन सन्तो रो …............. टेर नरसी जी रा सिमरथ सामी, दिया अमी रस पाय। एक बून्द सागर में रळगी, क्या करे रें यमराज।। 4 ।।        जिन्होंने मन मार लिया  मैं तो उन सन्तो रो …............. टेर

कहणा सुण ले मेरा

  कहणा सुण ले मेरा  मन थू कैणा कर ले गुरो रा, जो तुम केणा करो गुरो रा कट जावे, बंधन तेरा मन रे केणा सुण ले मेरा।। टेर ।। अवगुण तजो गुण ने पकडो मिट जाई घोर अंधेरा। सुरत शब्द से तार मिलावो रे कटे जन्म रा फेरा ।। 1 ।।               कहणा सुण ले मेरा ............ टेर निन्द्रा झुठ कपट ने त्यागो नहीं आवे जमडा नेडा। सतरी संगत चेतन रेणा वटे अमिरस वरसे गेरा ॥2।।               कहणा सुण ले मेरा ............ टेर उंडा उंडा नीर अतंग जल भरिया है अम्रत वेरा। सुगरा वो भर भर पीव नुगरो रा खाली फेरा ॥3।।               कहणा सुण ले मेरा ............ टेर आगली पाछली कर ले खबरिया क्या तेरा क्या मेरा । हेमनाथ सुणो भाई संतों ज्योरा अमरलोक मे डेरा ॥4।।               कहणा सुण ले मेरा ............ टेर

धेन दास की कथा लीरिक्स (Dhen Das ki katha Lyrics)

  धेन दास ब्राह्मण की कथा लीरिक्स (Dhen Das Brahman ki katha Lyrics) धेन दास ब्राह्मण की कथा [हिन्दी मे ]   मेहर हुई जद मेले मिलियो ,  परमेश्वर म्हाने पुत्र दियो। लागा पाप पुरबला भव रा ,  पुत्र पियाणो सुरग कियो।।   1 धेनदास मति करो कलपना ,  इण मारण संसार गियो।। जनम मरण रा आदू मारग ,  भोळिया भगत म्हारो मान कहयो।। टेर ।। पत्नि आय पास में बैठी ,  भोमि पर पोढाय दियो। धेनो ध्यान धरियों धणियों रो ,  गोविन्द उपर गुस्सो कियो।।  2                 धेनदास मति करो कलपना ................................ सारी रैण गहण ले बैठो ,  सैठो मतो सधीर कियो। पौ फाटी पाडोसी आया ,  दागण रो सैमोन कियो।।  3                         धेनदास मति करो कलपना ................................ धैनो केवे धीरप थे धारो ,  थे पिछतावो कियों कियो। म्हारे पुत्र ने म्...

गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी

  गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी  गुरु महिमा भजन गणपति सुरसति शारद सिंवरु, दीजो अनुभव वाणी।  परसत परसत पीर परासिया, परसी पीरों री सेलाणी।। 1 ।।       आज म्हाने गुरु मिलिया ब्रह्मज्ञानी। ज्ञान सुनाय कियो हरि नेडो, बात आगम री जाणी।। आज म्हाने गुरु मिलिया ब्रह्म ज्ञानी ।। टेर ।। दिल में दरसिया प्रेम सूं परासिया, सतगुरु री सैलानी। अगम निगम रा भेद बताया, आद जुगत ओलखाणी।। 2।।       आज म्हाने गुरु मिलिया .......... अल्ला खुदा अलख निरंजन, निराकार निर्वाणी। हरदम हेर घेर घर लावो, मिल गयी सात सेलाणी।। 3।।          आज म्हाने .............. गुरु अवधूता पूरा मिलिया, गुरु मिलिया गम जाणी।  कहे हेमनाथ, सतगुरुजी रे चरणे, नेचे सूरत समाणी।।4।।         आज म्हाने..........   

गुरुजी पाय लागूं सबद सुनाय दीजो

  गुरुजी पाय लागूं सबद सुनाय दीजो  गुरु महिमा भजन गुरुजी पाय लागूं सबद सुनाय दीजो। सुनाये दीजो समझाये दीजो, गुरुजी पाए लागू सबद सुनाये दीजो ।। टेर ।। जल की लहर उठे म्हारे दिल मे,      तन री तपन बुझाये दीजो।। 1।।                गुरुजी पाए लागूं ............ टेर घट में अंधेरो दाता, बाहर नही सूझे,       शबदो री जोत जगाये दीजो।।2।।                गुरुजी पाए लागूं ............ टेर असंग जुगों रो सूतो म्हारो हँसलो,       सुतोड़ा ने आय जगाये दीजो।।3।।                गुरुजी पाए लागूं ............ टेर धरमी दास री अरज वीणती,      काग सूं हंस बनाये दीजो।।4।।                गुरुजी पाए लागूं ............ टेर

सतगुरु ने बलिहारी

  सतगुरु ने बलिहारी  राजस्थानी गुरु महिमा भजन दोहा - सतगुरु बिना सोझी नहीं, सोझी सब घट माय।         रज्जब मक्की रा खेत री, चिड़ियां ने गम नाय।। टेर - बंधन काट किया निज मुक्ता, सारी विपदा निवारी,         जाऊँ म्हारा सतगुरु ने बलिहारी।। वाणी सुणत प्रेम सुख उपज्या, दुर्मति गयी हमारी।। भरम करम रा साँचा मेटिया, दीना कपाट उघाड़ी।।1।।               जाऊं म्हारा सतगुरु ने .............. टेर माया ब्रह्म रा भेद समझाया, सोहम लिया विचारी। आद पुरुष घट भीतर देखिया, दुविधा दूर विदारी।।2।।               जाऊं म्हारा सतगुरु ने .............. टेर दया करी म्हारा सतगुरु दाता, अबके लिया उबारी। भव सागर सूं डूबत तारयो, एड़ा पर उपकारी।।3।।               जाऊं म्हारा सतगुरु ने .............. टेर गुरु दादू रे चरण कमल पर, मेलू शीश उतारी। और भेंट क्या कर राखूं, सुन्दर भेंट तुम्हारी।।4।।               जाऊं म्हारा सतगुरु ने .........

सतगुरु चरणे जाय हरि गुण गाणा

  सतगुरु चरणे जाय   सतगुरु चरणे जाय हरि गुण गाणा  सतगुरु शरणे जाय हरि गुण गाणा अवसर वितों जाय देर नी करणा ॥ टेर ।। नर नारायण री देह मुश्किल मिलणा। सत को लेवो विचार असत को हरणा ॥ 1 ।।       सतगुरु शरणे जाय हरि गुण............ टेर तेरा धन जोबन परिवार अटे नी रेणा। जातो नी लागे वार साच सुण लेना। 2 ।।       सतगुरु शरणे जाय हरि गुण............ टेर माया रो अभिमान कभी नी करणा। जो करेला अभिमान चौरासी में पड़ना ॥ 3 ।।       सतगुरु शरणे जाय हरि गुण............ टेर उतरोला भव सू पार लेवो गुरु चरणा। सच केवे इशर राम यू भव सू तरणा ।। 4 ।।       सतगुरु शरणे जाय हरि गुण............ टेर

एड़ा कोई संत मिले

  एड़ा कोई संत मिले वारि जाऊ मन रे ऐड़ा माने सन्त मिले,   ज्योने देखिया नैण ठरे ।।टेर।। निर्मल नैण वैण ज्योरा निर्मल मन माहीं धीरब धरे।।1।। वारि जाऊ मन रे ऐडा माने सन्त मिले ज्योने देखिया नैण ठरे वारि जाऊ मन रे ऐड़ा माने सन्त मिले सील संतोष दया मन राखे जीवो पर दया वे करें।।2।। वारि जाऊ मन रे ऐड़ा माने सन्त मिले ज्योने देखिया नैण ठरे वारि जाऊ मन रे ऐड़ा माने सन्त मिले।। ज्ञान गुणा रा सतगुरु बालद भर लावे हीरलो रो चुण करें ।।3।। वारि जाऊ मन रे ऐड़ा माने सन्त मिले ज्योने देखिया नैण ठरे वारि जाऊ मन रे ऐडा माने सन्त मिले दोय कर जोड़ माली लिखमोजी बोले भव सू पार करें ।।4।। वारि जाऊ मन रे ऐड़ा माने सन्त मिले ज्योने देखिया नैण ठरे वारि जाऊ मन रे ऐडा माने सन्त मिले