सरव सुख तुम भजिये गोपाल (सोरठ भजन)
सोरठ भजन
सरव सुख तुम भजिये गोपाल
भजियां जावो नन्दलाल, सरव सुख तुम भजिये गोपाल
बाल पणा में कृष्ण सुदामा, पढता एक पोशाल ।
कंचन महल चुणाय दिया रे, हीरा जड़िया दीन दयाल ।।
सरव सुख तुम भजिये.....................
इन्द्र कोप कियो ब्रज उपर, बरस्यो मूसलाधार ।
गोपी ग्वालियों ने तार लियो रे, नख पर गिरवर धार ।।
सरव सुख तुम भजिये.....................
पत राखी पैलाद री, ध्रुवजी रो अविचल राज ।
जल डूबतो गजराज उबारियो, सरवर बांधी पाल ।।
सरव सुख तुम भजिये.....................
वृन्दावन री कुंज गली में, रास रसायो नन्दलाल ।
सब सखियो रे बीच में, नाच रह्यो नन्दलाल ।।
सरव सुख तुम भजिये.....................
आज बृज में आणन्द घणेरो, घर . घर मंगलाचार ।
मीरां दासी चरण श्याम री, हरि जी लियो अवतार ।।
सरव सुख तुम भजिये.....................
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